उत्तरकाण्ड · दोहा 126 · दोहा
मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास।
मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास।
जे यह कथा निरंतर सुनहिं मानि बिस्वास॥ १२६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.126 · पुस्तक पृ. 1041, 1041
भावार्थ और शब्दार्थ
1मुनि दुर्लभ हरि भगति नर पावहिं बिनहिं प्रयास।
यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है: जो लोग इस कथा को विश्वासपूर्वक निरंतर सुनते हैं, वे मुनियों के लिए भी दुर्लभ हरि-भक्ति बिना प्रयास के पा लेते हैं।
English explanation
AI-generated draft meaning: Those who continually listen to this account with faith obtain devotion to Hari, rare even for sages, without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के लिए | for sages |
| दुर्लभ | दुर्लभ; कठिनाई से मिलने वाली | rare; difficult to attain |
| हरि | भगवान हरि की | to Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| नर | मनुष्य; वे लोग | people; those persons |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | obtain |
| बिनहिं | बिना ही | without any |
| प्रयास | प्रयास; परिश्रम | effort; exertion |
2जे यह कथा निरंतर सुनहिं मानि बिस्वास॥ १२६॥
यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है: जो इस कथा को विश्वास रखकर निरंतर सुनते हैं, वे ऊपर कही गई हरि-भक्ति प्राप्त करते हैं।
English explanation
AI-generated draft meaning: Those who continually listen to this account with faith attain the devotion to Hari described in the preceding line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| यह | इस | this |
| कथा | कथा को | account; narrative |
| निरंतर | लगातार; नियमित रूप से | continually; regularly |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen to |
| मानि | मानकर; रखकर | accepting; placing |
| बिस्वास | विश्वास; श्रद्धा | faith; trust |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 126
- स्रोत अभिलेख
- 7.126
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1041, 1041
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।