उत्तरकाण्ड · दोहा 125 (ख) · दोहा
गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन।
गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन।
बिनु हरि कृपा न होइ सो गावहिं बेद पुरान॥ १२५ (ख) ॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.125 · पुस्तक पृ. 1040, 1040
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1गिरिजा संत समागम सम न लाभ कछु आन।
एआई प्रारूप: हे गिरिजा, संतों के संग के समान कोई अन्य लाभ नहीं है।
English explanation
AI draft: O Parvati, no other gain equals the company of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे गिरिजा (पार्वती) | O Parvati, daughter of the mountain |
| संत | संतों का | of saints |
| समागम | संग; मिलन | company; association |
| सम | के समान | equal to |
| न | नहीं | not |
| लाभ | लाभ | gain |
| कछु | कोई | any |
| आन | अन्य | other |
2बिनु हरि कृपा न होइ सो गावहिं बेद पुरान॥ १२५ (ख) ॥
एआई प्रारूप: हरि की कृपा के बिना वह संत-संग नहीं मिलता—वेद और पुराण यही गाते हैं।
English explanation
AI draft: That company of saints is not attained without Hari’s grace—so sing the Vedas and Puranas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| हरि | हरि (भगवान) की | of Hari, the Lord |
| कृपा | कृपा | grace |
| न | नहीं | not |
| होइ | होता; प्राप्त होता | comes about; is attained |
| सो | वह (संत-समागम) | that (company of saints) |
| गावहिं | गाते हैं; बखान करते हैं | sing; proclaim |
| बेद | वेद | the Vedas, sacred scriptures |
| पुरान | पुराण | the Puranas, sacred traditional narratives |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 125 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.125
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1040, 1040
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।