उत्तरकाण्ड · दोहा 129 · दोहा
मैं कृतकृत्य भइउँ अब तव प्रसाद बिस्वेस।
मैं कृतकृत्य भइउँ अब तव प्रसाद बिस्वेस।
उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेस॥ १२९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.129 · पुस्तक पृ. 1043, 1044
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मैं कृतकृत्य भइउँ अब तव प्रसाद बिस्वेस।
एआई-प्रारूप: हे विश्वेश्वर, आपकी कृपा से अब मैं कृतार्थ हो गया हूँ।
English explanation
AI draft: O Lord of the universe, by your grace I have now become fulfilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| कृतकृत्य | कृतार्थ; जिसका उद्देश्य पूरा हो गया हो | fulfilled; having accomplished one's purpose |
| भइउँ | हो गया हूँ | have become |
| अब | अब | now |
| तव | आपकी | your |
| प्रसाद | कृपा से | by grace |
| बिस्वेस | हे विश्वेश्वर, जगत के स्वामी शिव | O Lord of the universe, Shiva |
2उपजी राम भगति दृढ़ बीते सकल कलेस॥ १२९॥
एआई-प्रारूप: राम के प्रति दृढ़ भक्ति उत्पन्न हो गई है और सारे क्लेश दूर हो गए हैं।
English explanation
AI draft: Steadfast devotion to Rama has arisen, and all afflictions have passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उपजी | उत्पन्न हुई | arose |
| राम | भगवान राम के प्रति | toward Lord Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| दृढ़ | दृढ़; अटल | steadfast; firm |
| बीते | दूर हो गए; समाप्त हो गए | passed away; ended |
| सकल | सभी | all |
| कलेस | क्लेश; दुःख-संताप | afflictions; distress |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 129
- स्रोत अभिलेख
- 7.129
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1043, 1044
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।