उत्तरकाण्ड · दोहा 29 · दोहा
रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ।
रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ।
अनिमादिक सुख संपदा रहीं अवध सब छाइ॥ २९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.29 · पुस्तक पृ. 938, 938
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ।
जहाँ लक्ष्मीपति श्रीराम राजा हैं, उस नगर का वर्णन क्या किया जा सकता है?
English explanation
Can the city where Rama, the lord of Lakshmi, reigns as king truly be described?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रमानाथ | लक्ष्मी के पति, श्रीराम | Rama, lord of Lakshmi |
| जहँ | जहाँ | where |
| राजा | राजा हैं | is king |
| सो | वह; उस | that |
| पुर | नगर | city |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| कि | क्या | can; a rhetorical question marker |
| जाइ | जा सकता है | can be |
2अनिमादिक सुख संपदा रहीं अवध सब छाइ॥ २९॥
अणिमा आदि सिद्धियाँ, सुख और संपदाएँ सारी अयोध्या में छाई हुई थीं।
English explanation
The powers beginning with becoming minute, together with happiness and riches, pervaded all of Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनिमादिक | अणिमा आदि सिद्धियाँ | powers such as becoming minute |
| सुख | सुख; आनंद | happiness; well-being |
| संपदा | संपत्ति; समृद्धि | riches; prosperity |
| रहीं | रही थीं; विद्यमान थीं | remained; were present |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| सब | सारी; समस्त | all; the whole |
| छाइ | छाई हुई; व्याप्त | pervading; spread throughout |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 29
- स्रोत अभिलेख
- 7.29
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 938, 938
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।