उत्तरकाण्ड · दोहा 28 · दोहा
उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर।
उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर।
बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर॥ २८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.28 · पुस्तक पृ. 937, 937
भावार्थ और शब्दार्थ
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1उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर।
उत्तर दिशा में सरयू नदी बहती है; उसका जल निर्मल और गहरा है।
English explanation
To the north flows the Sarayu River, with clear, deep water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उत्तर | उत्तर | north |
| दिसि | दिशा में | in the direction |
| सरजू | सरयू नदी | the Sarayu River |
| बह | बहती है | flows |
| निर्मल | स्वच्छ | clear; pure |
| जल | पानी | water |
| गंभीर | गहरा | deep |
2बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर॥ २८॥
सुंदर घाट बनाए गए हैं; तट पर थोड़ी-सी भी कीचड़ नहीं है।
English explanation
Beautiful bathing steps have been built; there is not even a little mud along the bank.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँधे | निर्मित किए गए हैं | have been built |
| घाट | नदी तक उतरने के घाट | steps leading down to the river |
| मनोहर | सुंदर और मन को भाने वाले | beautiful and pleasing |
| स्वल्प | थोड़ा-सा भी | even a little |
| पंक | कीचड़ | mud |
| नहिं | नहीं है | there is none |
| तीर | तट पर | on the bank |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 28
- स्रोत अभिलेख
- 7.28
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 937, 937
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।