उत्तरकाण्ड · दोहा 27 · दोहा
चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ।
चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ।
राम चरित जे निरख मुनि ते मन लेहिं चोराइ॥ २७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.27 · पुस्तक पृ. 936, 936
भावार्थ और शब्दार्थ
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1चारु चित्रसाला गृह गृह प्रति लिखे बनाइ।
हर घर में सुंदर चित्रशालाएँ हैं, जिनमें रामचरित के चित्र सुंदर ढंग से बनाए गए हैं।
English explanation
Every house has a beautiful picture gallery, with scenes of Rama's deeds artfully painted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारु | सुंदर | beautiful |
| चित्रसाला | चित्रशालाएँ | picture galleries |
| गृह | घर | house |
| गृह | घर | house |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| लिखे | चित्रित किए गए हैं | are painted |
| बनाइ | सुंदर ढंग से बनाकर | with artful execution |
2राम चरित जे निरख मुनि ते मन लेहिं चोराइ॥ २७॥
राम के चरित के वे चित्र, जिन्हें मुनि देखते हैं, उनका मन चुरा लेते हैं।
English explanation
Those paintings of Rama's deeds, which the sages behold, steal their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित के चित्र | depictions of deeds |
| जे | जिन्हें | which |
| निरख | देखते हैं | behold |
| मुनि | मुनि | sages |
| ते | वे चित्र | those paintings |
| मन | मुनियों का मन | the sages' hearts |
| लेहिं | ले लेते हैं | take away |
| चोराइ | चुराकर | by stealing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 27
- स्रोत अभिलेख
- 7.27
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 936, 936
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