उत्तरकाण्ड · दोहा 30 · दोहा
एहि बिधि नगर नारि नर करहिं राम गुन गान।
एहि बिधि नगर नारि नर करहिं राम गुन गान।
सानुकूल सब पर रहहिं संतत कृपानिधान॥ ३०॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 939, 939
भावार्थ और शब्दार्थ
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1एहि बिधि नगर नारि नर करहिं राम गुन गान।
इस प्रकार नगर की स्त्रियाँ और पुरुष राम के गुणों का गान करते हैं।
English explanation
In this way, the women and men of the city sing of Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| नगर | नगर के | of the city |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| करहिं | करते हैं | perform |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुणों का | of the virtues |
| गान | गान | singing |
2सानुकूल सब पर रहहिं संतत कृपानिधान॥ ३०॥
कृपा के भंडार राम सब पर सदा अनुकूल और कृपालु रहते हैं।
English explanation
Rama, the repository of compassion, remains ever gracious toward everyone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुकूल | अनुकूल और कृपालु | gracious and well-disposed |
| सब | सभी | everyone |
| पर | पर; के प्रति | toward |
| रहहिं | रहते हैं | remains |
| संतत | सदा | always |
| कृपानिधान | कृपा के भंडार राम | Rama, the repository of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 30
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 939, 939
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