उत्तरकाण्ड · दोहा 46 · दोहा
मम गुन ग्राम नाम रत गत ममता मद मोह।
मम गुन ग्राम नाम रत गत ममता मद मोह।
ता कर सुख सोइ जानइ परानंद संदोह॥ ४६॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.46 · पुस्तक पृ. 952, 953
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1मम गुन ग्राम नाम रत गत ममता मद मोह।
AI-प्रारूप: जो मेरे गुणसमूह और नाम में अनुरक्त है तथा जिसकी ममता, अहंकार और मोह दूर हो गए हैं।
English explanation
AI draft: One who delights in my manifold virtues and name, and whose possessiveness, pride, and delusion have fallen away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| ग्राम | समूह | collection |
| नाम | नाम में | in the name |
| रत | अनुरक्त | devoted; delighting |
| गत | दूर हो गए हैं | have departed |
| ममता | मेरापन; आसक्ति | possessiveness; attachment |
| मद | अहंकार | pride |
| मोह | मोह | delusion |
2ता कर सुख सोइ जानइ परानंद संदोह॥ ४६॥
उस परम आनंद के पुंज रूप सुख को वही व्यक्ति स्वयं जानता है।
English explanation
That person alone knows their own happiness—a plenitude of supreme bliss.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ता | उस व्यक्ति का | of that person |
| कर | का | possessive marker: of |
| सुख | सुख | happiness |
| सोइ | वही व्यक्ति | that person alone |
| जानइ | जानता है | knows |
| परानंद | परम आनंद का | of supreme bliss |
| संदोह | पुंज; भरपूर राशि | plenitude; abundant mass |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 46
- स्रोत अभिलेख
- 7.46
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 952, 953
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