उत्तरकाण्ड · दोहा 47 · दोहा
उमा अवधबासी नर नारि कृतारथ रूप।
उमा अवधबासी नर नारि कृतारथ रूप।
ब्रह्म सच्चिदानंद घन रघुनायक जहँ भूप॥ ४७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.47 · पुस्तक पृ. 953, 954
भावार्थ और शब्दार्थ
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1उमा अवधबासी नर नारि कृतारथ रूप।
हे उमा, अवध में रहने वाले स्त्री-पुरुष कृतार्थता के साक्षात् रूप हैं।
English explanation
O Uma, the men and women who dwell in Ayodhya are the very embodiment of fulfillment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा (पार्वती) | O Uma (Parvati) |
| अवधबासी | अवध में रहने वाले | those dwelling in Ayodhya |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| कृतारथ | जिनका जीवन धन्य और सफल है | fulfilled and blessed |
| रूप | साक्षात् स्वरूप | the very embodiment |
2ब्रह्म सच्चिदानंद घन रघुनायक जहँ भूप॥ ४७॥
जहाँ रघुकुल के नायक राम राजा हैं, जो साक्षात् ब्रह्म और सत्, चित् तथा आनंद के घनीभूत स्वरूप हैं।
English explanation
For there, Rama, lord of the Raghu lineage—Brahman, the concentrated embodiment of being, consciousness, and bliss—is king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the supreme reality |
| सच्चिदानंद | सत्, चित् और आनंद स्वरूप | being, consciousness, and bliss |
| घन | घनीभूत स्वरूप | concentrated embodiment |
| रघुनायक | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| जहँ | जहाँ (अवध में) | where (in Ayodhya) |
| भूप | राजा हैं | is king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 47
- स्रोत अभिलेख
- 7.47
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 953, 954
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