उत्तरकाण्ड · दोहा 12 (ख) · दोहा
भिन्न भिन्न अस्तुति करि गए सुर निज निज धाम।
भिन्न भिन्न अस्तुति करि गए सुर निज निज धाम।
बंदी बेष बेद तब आए जहँ श्रीराम॥ १२ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 919, 919
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भिन्न भिन्न अस्तुति करि गए सुर निज निज धाम।
देवता अलग-अलग स्तुति करके अपने-अपने धाम चले गए।
English explanation
After offering their individual praises, the gods departed to their respective abodes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भिन्न | अलग | separate |
| भिन्न | अलग; प्रत्येक अपनी तरह | individually; each in their own way |
| अस्तुति | स्तुति, प्रशंसा | praise |
| करि | करके | having offered |
| गए | चले गए | departed |
| सुर | देवता | the gods |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अपने | respective; each one’s own |
| धाम | धाम, निवास | abodes |
2बंदी बेष बेद तब आए जहँ श्रीराम॥ १२ (ख)॥
तब वेद भाटों के वेश में वहाँ आए जहाँ श्रीराम थे।
English explanation
Then the Vedas came in the guise of court bards to where Rama was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदी | भाट, यश गाने वाले | court bards; panegyrists |
| बेष | वेश, रूप में | in the guise |
| बेद | वेद, व्यक्तिरूप में | the Vedas personified |
| तब | तब | then |
| आए | आए | came |
| जहँ | जहाँ | where |
| श्रीराम | श्रीराम | Lord Rama |
| ख | पद्य-संदर्भ का उपखंड-चिह्न ‘ख’ | verse-reference subdivision marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 12 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 919, 919
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।