उत्तरकाण्ड · दोहा 12 (ग) · दोहा
प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान।
प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान।
लखेउ न काहूँ मरम कछु लगे करन गुन गान॥ १२ (ग)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 919, 919
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभु सर्बग्य कीन्ह अति आदर कृपानिधान।
सर्वज्ञ और कृपा के भंडार प्रभु राम ने उनका बहुत आदर किया।
English explanation
The all-knowing Lord Rama, the treasury of compassion, honored them greatly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सर्बग्य | सब कुछ जानने वाले | all-knowing |
| कीन्ह | किया | did; bestowed |
| अति | बहुत, अत्यंत | greatly; exceedingly |
| आदर | सम्मान | honor |
| कृपानिधान | कृपा के भंडार | treasury of compassion |
2लखेउ न काहूँ मरम कछु लगे करन गुन गान॥ १२ (ग)॥
किसी ने भी उनका रहस्य तनिक नहीं पहचाना; वे राम के गुणों का गान करने लगे।
English explanation
No one perceived anything of their hidden identity; they began singing Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखेउ | पहचाना, समझा | perceived; recognized |
| न | नहीं | not |
| काहूँ | किसी ने भी | anyone |
| मरम | रहस्य, वास्तविक पहचान | secret; hidden identity |
| कछु | कुछ भी, तनिक भी | anything; even a little |
| लगे | लगे, आरंभ किया | began |
| करन | करने | to perform |
| गुन | राम के गुण | Rama’s virtues |
| गान | गान, गायन | singing; song |
| ग | पद्य-संदर्भ का उपखंड-चिह्न ‘ग’ | verse-reference subdivision marker ‘ग’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 12 (ग)
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 919, 919
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