उत्तरकाण्ड · दोहा 13 (क) · दोहा/सोरठा
सब के देखत बेदन्ह बिनती कीन्हि उदार।
सब के देखत बेदन्ह बिनती कीन्हि उदार।
अंतर्धान भए पुनि गए ब्रह्म आगार।।13(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सब के देखत बेदन्ह बिनती कीन्हि उदार।
सबके सामने वेदों ने उदात्त विनती की।
English explanation
Before everyone, the personified Vedas offered a noble supplication.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | everyone |
| के | के | while |
| देखत | देखते हुए | watching |
| बेदन्ह | वेदों ने | the personified Vedas |
| बिनती | प्रार्थना | supplication |
| कीन्हि | की | offered |
| उदार | उदात्त | noble |
2 अंतर्धान भए पुनि गए ब्रह्म आगार।।13(क)।।
फिर वे अंतर्धान होकर ब्रह्मा के धाम चले गए।
English explanation
Then they vanished and went to Brahma's abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंतर्धान | अदृश्य | invisible |
| भए | हो गए | became |
| पुनि | फिर | then |
| गए | चले गए | went |
| ब्रह्म | ब्रह्मा के | Brahma's |
| आगार | धाम | abode |
| क | संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
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