उत्तरकाण्ड · दोहा 13 (ख) · दोहा/सोरठा
बैनतेय सुनु संभु तब आए जहँ रघुबीर।
बैनतेय सुनु संभु तब आए जहँ रघुबीर।
बिनय करत गदगद गिरा पूरित पुलक सरीर।।13(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 बैनतेय सुनु संभु तब आए जहँ रघुबीर।
हे गरुड़, सुनो: तब शिव वहाँ आए जहाँ रघुवीर राम थे।
English explanation
Listen, Garuda: then Shiva came to where Rama, hero of Raghu's lineage, was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैनतेय | हे विनता-पुत्र गरुड़ | O Garuda, son of Vinata |
| सुनु | सुनो | listen |
| संभु | शिव | Shiva |
| तब | तब | then |
| आए | आए | came |
| जहँ | जहाँ | where |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
2 बिनय करत गदगद गिरा पूरित पुलक सरीर।।13(ख)।।
शिव भाव से रुंधी वाणी में विनती करने लगे; उनका शरीर रोमांच से भर गया था।
English explanation
Shiva offered supplication in a voice choked with emotion, his body covered in thrilled goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनय | विनती | supplication |
| करत | करते हुए | offering |
| गदगद | भाव से रुंधी | choked with emotion |
| गिरा | वाणी | voice |
| पूरित | भरा हुआ | filled |
| पुलक | रोमांच से | with thrilled goosebumps |
| सरीर | शरीर | body |
| ख | संदर्भ-चिह्न (ख) | reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 13 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
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