उत्तरकाण्ड · दोहा 114 (ख) · दोहा
भगति पच्छ हठ करि रहेउँ दीन्हि महारिषि साप।
भगति पच्छ हठ करि रहेउँ दीन्हि महारिषि साप।
मुनि दुर्लभ बर पायउँ देखहु भजन प्रताप॥ ११४ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भगति पच्छ हठ करि रहेउँ दीन्हि महारिषि साप।
एआई-प्रारूप: मैं हठपूर्वक भक्ति के पक्ष में अड़ा रहा; महर्षि ने मुझे शाप दिया।
English explanation
AI draft: I remained firmly insistent on the side of devotion; the great sage cursed me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति के | of devotion |
| पच्छ | पक्ष में | on the side |
| हठ | हठ | firm insistence |
| करि | करके | having maintained |
| रहेउँ | मैं अड़ा रहा | I persisted |
| दीन्हि | दिया | gave |
| महारिषि | महर्षि ने | the great sage |
| साप | शाप | a curse |
2मुनि दुर्लभ बर पायउँ देखहु भजन प्रताप॥ ११४ (ख)॥
एआई-प्रारूप: मैंने ऐसा वर पाया जो मुनियों को भी दुर्लभ है; देखिए भजन का प्रताप।
English explanation
AI draft: I received a boon rare even for sages; behold the power of devotional worship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के लिए | for sages |
| दुर्लभ | दुर्लभ | hard to obtain |
| बर | वरदान | boon |
| पायउँ | मैंने पाया | I obtained |
| देखहु | देखिए | behold |
| भजन | भक्ति-भजन का | of devotional worship |
| प्रताप | प्रभाव और महिमा | power and glory |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 114 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
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