उत्तरकाण्ड · दोहा 114 (क) · दोहा
ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह।
ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह।
निज प्रभु दरसन पायउँ गए सकल संदेह॥ ११४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.114 · पुस्तक पृ. 1021, 1022
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ताते यह तन मोहि प्रिय भयउ राम पद नेह।
एआई-प्रारूप: इसलिए यह शरीर मुझे प्रिय हो गया कि इसमें राम के चरणों से प्रेम हुआ।
English explanation
AI draft: Thus this body became dear to me, for in it I gained love for Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसलिए | therefore |
| यह | यह | this |
| तन | शरीर | body |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| भयउ | हो गया | became |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | for the feet |
| नेह | प्रेम | love |
2निज प्रभु दरसन पायउँ गए सकल संदेह॥ ११४ (क)॥
एआई-प्रारूप: मैंने अपने प्रभु के दर्शन पाए और मेरे सभी संदेह मिट गए।
English explanation
AI draft: I beheld my own Lord, and all my doubts vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | my own |
| प्रभु | प्रभु के | of the Lord |
| दरसन | दर्शन | sight; beholding |
| पायउँ | मैंने पाए | I obtained |
| गए | मिट गए | vanished |
| सकल | सभी | all |
| संदेह | संदेह | doubts |
| क | पद्य-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 114 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.114
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1021, 1022
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।