उत्तरकाण्ड · दोहा 113 (ख) · दोहा
जेहिं आश्रम तुम्ह बसब पुनि सुमिरत श्रीभगवंत।
जेहिं आश्रम तुम्ह बसब पुनि सुमिरत श्रीभगवंत।
ब्यापिहि तहँ न अबिद्या जोजन एक प्रजंत॥ ११३ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जेहिं आश्रम तुम्ह बसब पुनि सुमिरत श्रीभगवंत।
एआई-प्रारूप अर्थ: फिर जिस आश्रम में तुम भगवान का स्मरण करते हुए रहोगे—
English explanation
AI-draft meaning: Further, in whichever hermitage you dwell while remembering the Lord—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिसमें; जिस | in whichever; which |
| आश्रम | आश्रम; साधना का निवास | hermitage; spiritual dwelling |
| तुम्ह | तुम | you |
| बसब | रहोगे; निवास करोगे | will dwell |
| पुनि | फिर; और भी | further; moreover |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | while remembering |
| श्रीभगवंत | भगवान का | the revered Lord |
2ब्यापिहि तहँ न अबिद्या जोजन एक प्रजंत॥ ११३ (ख)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: वहाँ एक योजन तक के क्षेत्र में अविद्या नहीं व्यापेगी।
English explanation
AI-draft meaning: Ignorance will not pervade the area there for a distance of one yojana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्यापिहि | व्यापेगी; फैलेगी | will pervade; spread |
| तहँ | वहाँ | there |
| न | नहीं | not |
| अबिद्या | अविद्या; आध्यात्मिक अज्ञान | ignorance; spiritual unawareness |
| जोजन | योजन; दूरी की एक प्राचीन इकाई | yojana, an ancient unit of distance |
| एक | एक | one |
| प्रजंत | तक; की सीमा तक | up to; extending as far as |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 113 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।