उत्तरकाण्ड · दोहा 113 (क) · दोहा
सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ गुन भवन अमान।
सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ गुन भवन अमान।
कामरूप इच्छामरन ग्यान बिराग निधान॥ ११३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ और शब्दार्थ
1सदा राम प्रिय होहु तुम्ह सुभ गुन भवन अमान।
एआई-प्रारूप अर्थ: तुम सदा राम के प्रिय, शुभ गुणों के धाम और अभिमानरहित रहो।
English explanation
AI-draft meaning: May you always be dear to Rama, an abode of noble qualities, and free from pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सदा | सदैव | always |
| राम | भगवान राम के | to Lord Rama |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| होहु | होओ; बने रहो | may you be; remain |
| तुम्ह | तुम | you |
| सुभ | शुभ; अच्छे | noble; good |
| गुन | गुणों के | of qualities |
| भवन | धाम; आश्रय | abode; repository |
| अमान | अभिमानरहित | free from pride |
2कामरूप इच्छामरन ग्यान बिराग निधान॥ ११३ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: तुम इच्छानुसार रूप धारण करने वाले, अपनी इच्छा से मृत्यु का समय चुनने वाले और ज्ञान-वैराग्य के भंडार होओ।
English explanation
AI-draft meaning: May you be able to assume any form at will, choose the time of your death, and be a treasury of knowledge and detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कामरूप | इच्छानुसार रूप धारण करने वाले | able to assume a form at will |
| इच्छामरन | इच्छानुसार मृत्यु का समय चुनने वाले | able to choose when to die |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिराग | वैराग्य; आसक्ति का अभाव | detachment; freedom from attachment |
| निधान | भंडार; निधि | treasury; repository |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 113 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।