उत्तरकाण्ड · दोहा 120 (ख) · दोहा
बिरति चर्म असि ग्यान मद लोभ मोह रिपु मारि।
बिरति चर्म असि ग्यान मद लोभ मोह रिपु मारि।
जय पाइअ सो हरि भगति देखु खगेस बिचारि॥ १२० (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
भावार्थ और शब्दार्थ
1बिरति चर्म असि ग्यान मद लोभ मोह रिपु मारि।
वैराग्य-रूपी ढाल और ज्ञान-रूपी तलवार से मद, लोभ और मोह जैसे शत्रुओं को मारकर—
English explanation
With dispassion as a shield and knowledge as a sword, slaying the enemies of pride, greed, and delusion—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिरति | वैराग्य, आसक्ति का अभाव | dispassion, freedom from attachment |
| चर्म | ढाल | shield |
| असि | तलवार | sword |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| मद | अहंकार या मद | pride or arrogance |
| लोभ | लोभ | greed |
| मोह | मोह, भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion and attachment |
| रिपु | शत्रुओं को | the enemies |
| मारि | मारकर | having slain |
2जय पाइअ सो हरि भगति देखु खगेस बिचारि॥ १२० (ख)॥
जो विजय प्राप्त होती है, वही हरि की भक्ति है; हे पक्षिराज गरुड़, विचार करके देखो।
English explanation
The victory thus attained is devotion to Hari; reflect and see this, O Garuda, king of birds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | विजय | victory |
| पाइअ | प्राप्त होती है | is attained |
| सो | वही, वह विजय | that very victory |
| हरि | हरि, भगवान विष्णु अथवा राम | Hari, the Lord Vishnu or Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| देखु | देखो, समझो | see, recognize |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| बिचारि | विचार करके | after reflection |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 120 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।