उत्तरकाण्ड · दोहा 120 (क) · दोहा
ब्रह्म पयोनिधि मंदर ग्यान संत सुर आहिं।
ब्रह्म पयोनिधि मंदर ग्यान संत सुर आहिं।
कथा सुधा मथि काढ़हिं भगति मधुरता जाहिं॥ १२० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.12 · पुस्तक पृ. 1030, 1032
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ब्रह्म पयोनिधि मंदर ग्यान संत सुर आहिं।
एआई-प्रारूप: ब्रह्म दूध का समुद्र है, ज्ञान मंदर पर्वत है और संत देवता हैं।
English explanation
AI draft: Brahman is the ocean of milk, knowledge is Mount Mandara, and the saints are the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रह्म | ब्रह्म, परम तत्त्व | Brahman, the ultimate reality |
| पयोनिधि | दूध का समुद्र | the ocean of milk |
| मंदर | मंदर पर्वत, मंथन का आधार | Mount Mandara, the churning mountain |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| संत | संतजन | saints |
| सुर | देवता | gods |
| आहिं | हैं | are |
2कथा सुधा मथि काढ़हिं भगति मधुरता जाहिं॥ १२० (क)॥
संत मंथन करके कथा-रूपी अमृत निकालते हैं, जिसमें भक्ति ही मिठास है।
English explanation
The saints churn and draw out the nectar of sacred narrative, whose sweetness is devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कथा | भगवान की कथा | the sacred narrative of the Lord |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| मथि | मथकर | having churned |
| काढ़हिं | निकालते हैं | draw out |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मधुरता | मिठास | sweetness |
| जाहिं | जिसमें | in which |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 120 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.12
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1030, 1032
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।