उत्तरकाण्ड · दोहा 121 (क) · दोहा
एक ब्याधि बस नर मरहिं ए असाधि बहु ब्याधि।
एक ब्याधि बस नर मरहिं ए असाधि बहु ब्याधि।
पीड़हिं संतत जीव कहुँ सो किमि लहै समाधि॥ १२१ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ और शब्दार्थ
1एक ब्याधि बस नर मरहिं ए असाधि बहु ब्याधि।
एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप: एक ही रोग के वश में होकर मनुष्य मर जाते हैं; यहाँ तो ये अनेक असाध्य रोग हैं।
English explanation
AI-generated draft interpretation: People die under the power of even one disease; here there are many incurable diseases.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक ही | even one |
| ब्याधि | रोग | disease |
| बस | के वश में | under the power of |
| नर | मनुष्य | people |
| मरहिं | मर जाते हैं | die |
| ए | ये | these |
| असाधि | असाध्य; जिन्हें ठीक करना कठिन है | incurable; difficult to cure |
| बहु | अनेक | many |
| ब्याधि | रोग | diseases |
2पीड़हिं संतत जीव कहुँ सो किमि लहै समाधि॥ १२१ (क)॥
ये रोग जीव को निरंतर पीड़ित करते हैं; वह चित्त की शांति और स्थिरता कैसे प्राप्त करे?
English explanation
These diseases continually afflict the living being; how can that being attain peace and collectedness of mind?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पीड़हिं | पीड़ा देते हैं | afflict |
| संतत | निरंतर | continually |
| जीव | जीव; प्राणी | the living being |
| कहुँ | को | to; marking the affected being |
| सो | वह जीव | that being |
| किमि | कैसे | how |
| लहै | प्राप्त करे | can attain |
| समाधि | चित्त की शांति और एकाग्र स्थिरता | peace and meditative collectedness |
| क | दोहा १२१ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 121 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 121 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।