उत्तरकाण्ड · दोहा 121 (ख) · दोहा
नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान।
नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान।
भेषज पुनि कोटिन्ह नहिं रोग जाहिं हरिजान॥ १२१ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ और शब्दार्थ
1नेम धर्म आचार तप ग्यान जग्य जप दान।
नियम, धर्मपालन, सदाचार, तप, ज्ञान, यज्ञ, जप और दान—ये सब उपचार हैं; अगली पंक्ति बताती है कि इनसे भी रोग नहीं मिटते।
English explanation
Disciplined observances, religious duty, good conduct, austerity, knowledge, sacrifice, repetition of sacred formulas, and charity are remedies; the next line says that even these do not remove the diseases.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नेम | नियम और नियमित साधना | disciplined observances |
| धर्म | धर्मपालन | fulfillment of religious duty |
| आचार | सदाचार | good conduct |
| तप | तपस्या | austerity |
| ग्यान | ज्ञान | spiritual knowledge |
| जग्य | यज्ञ | ritual sacrifice |
| जप | मंत्र या नाम का बारंबार उच्चारण | repetition of a mantra or sacred name |
| दान | दान देना | charitable giving |
2भेषज पुनि कोटिन्ह नहिं रोग जाहिं हरिजान॥ १२१ (ख)॥
फिर भी, हे हरि के सेवक गरुड़, ऐसे करोड़ों उपचारों से भी ये रोग नहीं जाते।
English explanation
Yet, O Garuda, servant of Hari, even millions of such remedies do not make these diseases go away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेषज | औषधियाँ; उपचार | medicines; remedies |
| पुनि | फिर भी | yet; even so |
| कोटिन्ह | करोड़ों से भी | even with millions of them |
| नहिं | नहीं | not |
| रोग | रोग | the diseases |
| जाहिं | दूर होते हैं | go away |
| हरिजान | हे हरि के सेवक गरुड़ | O Garuda, servant of Hari |
| ख | दोहा १२१ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 121 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 121 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।