उत्तरकाण्ड · दोहा 3 (ख) · दोहा
बहुतक चढ़ीं अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान।
बहुतक चढ़ीं अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान।
देखि मधुर सुर हरषित करहिं सुमंगल गान॥ ३ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 909, 910
भावार्थ और शब्दार्थ
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1बहुतक चढ़ीं अटारिन्ह निरखहिं गगन बिमान।
बहुत-सी स्त्रियाँ अटारियों पर चढ़ीं और आकाश में विमान को देख रही हैं।
English explanation
Many women climbed onto the upper terraces and are watching the aerial chariot in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुतक | बहुत-सी स्त्रियाँ | many women |
| चढ़ीं | ऊपर चढ़ीं | climbed up |
| अटारिन्ह | अटारियों पर | onto the upper terraces |
| निरखहिं | देखती हैं | watch; gaze at |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| बिमान | विमान; यहाँ पुष्पक विमान | the aerial chariot, here Pushpaka |
2देखि मधुर सुर हरषित करहिं सुमंगल गान॥ ३ (ख)॥
विमान को देखकर प्रसन्न स्त्रियाँ मधुर स्वर में शुभ मंगलगीत गाती हैं।
English explanation
Delighted at the sight of the aerial chariot, the women sing auspicious songs in sweet voices.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| मधुर | मीठे; सुरीले | sweet; melodious |
| सुर | स्वर में | in voices or tones |
| हरषित | प्रसन्न होकर | delighted |
| करहिं | करती हैं | perform |
| सुमंगल | अत्यंत शुभ; मंगलमय | auspicious |
| गान | गायन; गीत | singing; songs |
| ख | दोहा ३ का उपखंड-सूचक ‘ख’ | reference marker for part (b) of verse 3 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 3 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 909, 910
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