उत्तरकाण्ड · दोहा 96 (क) · दोहा
प्रथम जन्म के चरित अब कहउँ सुनहु बिहगेस।
प्रथम जन्म के चरित अब कहउँ सुनहु बिहगेस।
सुनि प्रभु पद रति उपजइ जातें मिटहिं कलेस॥ ९६ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ और शब्दार्थ
1प्रथम जन्म के चरित अब कहउँ सुनहु बिहगेस।
एआई-प्रारूप अर्थ: हे पक्षिराज गरुड़, अब मैं अपने पहले जन्म का चरित कहता हूँ; सुनिए।
English explanation
AI-draft meaning: O Garuda, king of birds, I shall now recount the story of my first birth; listen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहले | first |
| जन्म | जन्म | birth |
| के | के; जन्म से संबंधित | of; belonging to that birth |
| चरित | जीवन-वृत्तांत | life story |
| अब | अब | now |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I recount |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| बिहगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2सुनि प्रभु पद रति उपजइ जातें मिटहिं कलेस॥ ९६ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: इस चरित को सुनकर प्रभु के चरणों में प्रेम उत्पन्न होता है, जिससे क्लेश मिट जाते हैं।
English explanation
AI-draft meaning: Hearing this account brings forth love for the Lord’s feet, through which afflictions disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | upon hearing |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| पद | चरणों में | for the feet |
| रति | प्रेम | love |
| उपजइ | उत्पन्न होता है | arises |
| जातें | जिससे | through which |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| कलेस | दुःख और संताप | afflictions and distress |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 96 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।