उत्तरकाण्ड · सोरठा 95 (ख) · सोरठा
पाट कीट तें होइ तेहि तें पाटंबर रुचिर।
पाट कीट तें होइ तेहि तें पाटंबर रुचिर।
कृमि पालइ सबु कोइ परम अपावन प्रान सम॥ ९५ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.95 · पुस्तक पृ. 997, 997
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पाट कीट तें होइ तेहि तें पाटंबर रुचिर।
रेशम कीड़े से होता है और उस रेशम से सुंदर रेशमी वस्त्र बनते हैं।
English explanation
Silk comes from a worm, and beautiful silken garments are made from that silk.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पाट | रेशम | silk |
| कीट | रेशम का कीड़ा | silkworm |
| तें | से | from |
| होइ | होता है; उत्पन्न होता है | comes into being; is produced |
| तेहि | उस रेशम | that silk |
| तें | से | from |
| पाटंबर | रेशमी वस्त्र | silken garments |
| रुचिर | सुंदर; मनोहर | beautiful; lovely |
2कृमि पालइ सबु कोइ परम अपावन प्रान सम॥ ९५ (ख)॥
अत्यंत अपवित्र उस कीड़े को भी सब लोग अपने प्राणों के समान पालते हैं।
English explanation
Everyone nurtures that worm, though exceedingly impure, as dearly as their own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृमि | कीड़े को | the worm |
| पालइ | पालता है | nurtures; raises |
| सबु | हर | every |
| कोइ | व्यक्ति | person |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| अपावन | अपवित्र | impure |
| प्रान | प्राणों; जीवन | one's life |
| सम | के समान | like; as dearly as |
| ख | पद का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | verse reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 95 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.95
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 997, 997
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