उत्तरकाण्ड · दोहा 96 (ख) · दोहा
पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल।
पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल।
नर अरु नारि अधर्म रत सकल निगम प्रतिकूल॥ ९६ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ और शब्दार्थ
1पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल।
एआई-प्रारूप अर्थ: हे प्रभु, एक पूर्व कल्प में कलियुग था—पाप और कलुष का मूल।
English explanation
AI-draft meaning: O lord, in a previous cosmic cycle there was the age of Kali, the root of sin and impurity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरुब | पूर्व के | previous |
| कल्प | कल्प में; दीर्घ ब्रह्मांडीय काल में | in a cosmic cycle |
| एक | एक | one; a |
| प्रभु | हे प्रभु; हे गरुड़ | O lord; addressing Garuda |
| जुग | युग | age |
| कलिजुग | कलियुग | the age of Kali |
| मल | पाप और कलुष का | of sin and impurity |
| मूल | मूल; स्रोत | root; source |
2नर अरु नारि अधर्म रत सकल निगम प्रतिकूल॥ ९६ (ख)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: सभी पुरुष और स्त्रियाँ अधर्म में लगे हुए थे और वेदों के प्रतिकूल आचरण करते थे।
English explanation
AI-draft meaning: All men and women were absorbed in unrighteousness and lived contrary to the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | पुरुष | men |
| अरु | और | and |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| अधर्म | अधर्म में | in unrighteousness |
| रत | लगे हुए | absorbed; engaged |
| सकल | सभी | all |
| निगम | वेदों के | to the Vedas |
| प्रतिकूल | विरुद्ध आचरण वाले | contrary in conduct |
| ख | पद-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 96 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।