उत्तरकाण्ड · दोहा 97 (क) · दोहा
कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदगं्रथ।
कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदगं्रथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥ ९७ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदगं्रथ।
एआई प्रारूप: कलियुग के दोषों ने धर्म को ग्रस लिया और सभी सद्ग्रंथ लुप्त हो गए।
English explanation
AI draft: The evils of the age of Kali consumed righteousness, and all good scriptures disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलिमल | कलियुग के दोषों ने | the evils of the age of Kali |
| ग्रसे | ग्रस लिया | consumed |
| धर्म | धर्म को | righteousness |
| सब | सभी | all |
| लुप्त | लुप्त | lost |
| भए | हो गए | became |
| सदगं्रथ | सद्ग्रंथ; उत्तम धर्मग्रंथ | good scriptures |
2दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥ ९७ (क)॥
दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना करके अनेक पंथ प्रकट किए।
English explanation
The pretentious devised and put forward many sects according to their own thinking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंभिन्ह | दंभियों ने | the pretentious |
| निज | अपनी | their own |
| मति | बुद्धि से | according to their thinking |
| कल्पि | कल्पना करके | having devised |
| करि | करके | having done so |
| प्रगट | प्रकट | manifest |
| किए | किए | made |
| बहु | अनेक | many |
| पंथ | पंथ; धार्मिक मार्ग | sects or religious paths |
| क | पद-संदर्भ का ‘क’ चिह्न | verse-reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 97 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।