उत्तरकाण्ड · दोहा 97 (ख) · दोहा
भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म।
भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म।
सुनु हरिजान ग्यान निधि कहउँ कछुक कलिधर्म॥ ९७ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.97 · पुस्तक पृ. 999, 999
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म।
सब लोग मोह के वश में हो गए और लोभ ने शुभ कर्मों को ग्रस लिया।
English explanation
Everyone fell under the sway of delusion, and greed consumed good deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| लोग | लोग | people |
| सब | सब | all |
| मोहबस | मोह के वश में | subject to delusion |
| लोभ | लोभ ने | greed |
| ग्रसे | ग्रस लिया | consumed |
| सुभ | शुभ; अच्छे | good; virtuous |
| कर्म | कर्मों को | deeds |
2सुनु हरिजान ग्यान निधि कहउँ कछुक कलिधर्म॥ ९७ (ख)॥
हे हरि के भक्त, ज्ञान के भंडार, सुनो! मैं कलियुग के आचरणों का कुछ वर्णन करता हूँ।
English explanation
Listen, devotee of Hari, treasure of knowledge! I shall describe some of the ways of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| हरिजान | हे हरि के भक्त | O devotee of Hari |
| ग्यान | ज्ञान के | of knowledge |
| निधि | हे भंडार | O treasure |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I shall tell |
| कछुक | कुछ | some |
| कलिधर्म | कलियुग के आचरण | the ways of the age of Kali |
| ख | पद-संदर्भ का ‘ख’ चिह्न | verse-reference marker ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 97 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.97
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 999, 999
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।