उत्तरकाण्ड · दोहा 39 · दोहा
पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपबाद।
पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपबाद।
ते नर पाँवर पापमय देह धरें मनुजाद॥ ३९॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.39 · पुस्तक पृ. 946, 947
भावार्थ और शब्दार्थ
1पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपबाद।
एआई-प्रारूप: जो दूसरों से द्रोह करते हैं और दूसरे की पत्नी, दूसरे के धन तथा दूसरों की निंदा में आसक्त रहते हैं—
English explanation
AI draft: Those who act maliciously toward others and are engrossed in others’ wives, others’ wealth, and slandering others—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों के प्रति | toward others |
| द्रोही | द्रोह करने वाले | those who act maliciously |
| पर | दूसरे की | another’s |
| दार | पत्नी | wife |
| रत | आसक्त | engrossed in |
| पर | दूसरे का | another’s |
| धन | धन | wealth |
| पर | दूसरों की | of others |
| अपबाद | निंदा | slander |
2ते नर पाँवर पापमय देह धरें मनुजाद॥ ३९॥
वे मनुष्य नीच और पापमय हैं; वे मानव-देह धारण किए हुए नरभक्षी राक्षस हैं।
English explanation
Such people are base and steeped in sin: they are man-eating demons wearing human bodies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| पाँवर | नीच | base |
| पापमय | पाप से भरे हुए | steeped in sin |
| देह | मानव-शरीर | human bodies |
| धरें | धारण किए हुए | wearing |
| मनुजाद | मनुष्यभक्षी राक्षस | man-eating demons |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 39
- स्रोत अभिलेख
- 7.39
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 946, 947
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।