उत्तरकाण्ड · दोहा 38 · दोहा
निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज।
निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज।
ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुखपुंज॥ ३८॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.38 · पुस्तक पृ. 945, 946
भावार्थ और शब्दार्थ
1निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज।
एआई मसौदा: जिनके लिए निंदा और स्तुति दोनों समान हैं और जिनका ममत्व मेरे चरण-कमलों में है।
English explanation
AI draft: Those who regard blame and praise alike and whose loving attachment rests in my lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निंदा | निंदा; बुराई | blame; disparagement |
| अस्तुति | स्तुति; प्रशंसा | praise |
| उभय | दोनों | both |
| सम | समान | equal; alike |
| ममता | ममत्व; प्रेमपूर्ण लगाव | loving attachment |
| मम | मेरे | my |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल; चरणों के लिए उपमा | lotuses, describing the feet |
2ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुखपुंज॥ ३८॥
एआई मसौदा: वे सज्जन मुझे प्राणों के समान प्रिय हैं; वे गुणों के धाम और सुख की राशि हैं।
English explanation
AI draft: Those virtuous people are as dear to me as life itself, abodes of virtue and embodiments of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे; ऐसे लोग | those; such people |
| सज्जन | सज्जन; संत-स्वभाव वाले लोग | virtuous, saintly people |
| मम | मेरे; मुझे | to me; my |
| प्रानप्रिय | प्राणों के समान प्रिय | as dear as life itself |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| मंदिर | धाम; निवास-स्थान | abodes; dwelling places |
| सुखपुंज | सुख की राशि | embodiments of happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 38
- स्रोत अभिलेख
- 7.38
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 946
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।