उत्तरकाण्ड · दोहा 37 · दोहा
ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड।
ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड।
अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड॥ ३७॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.37 · पुस्तक पृ. 945, 945
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ताते सुर सीसन्ह चढ़त जग बल्लभ श्रीखंड।
एआई-प्रारूप: इसीलिए संसार का प्रिय चंदन देवताओं के सिरों पर चढ़ाया जाता है।
English explanation
AI draft: Thus sandalwood, beloved by the world, is offered upon the heads of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसीलिए | therefore |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| सीसन्ह | सिरों पर | upon the heads |
| चढ़त | चढ़ाया जाता है | is placed as an offering |
| जग | संसार का | of the world |
| बल्लभ | प्रिय | beloved |
| श्रीखंड | चंदन | sandalwood |
2अनल दाहि पीटत घनहिं परसु बदन यह दंड॥ ३७॥
एआई-प्रारूप: कुल्हाड़ी के मुख को आग में तपाना और हथौड़े से पीटना—यह उसका दंड है।
English explanation
AI draft: Heating the axe’s cutting face in fire and beating it with a hammer—this is its punishment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनल | आग में | in fire |
| दाहि | जलाकर या तपाकर | having burned or heated |
| पीटत | पीटते हैं | beat |
| घनहिं | हथौड़े से | with a hammer |
| परसु | कुल्हाड़ी का | of the axe |
| बदन | मुख या धार वाला भाग | face or cutting edge |
| यह | यह | this |
| दंड | दंड | punishment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 37
- स्रोत अभिलेख
- 7.37
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 945
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