उत्तरकाण्ड · दोहा 40 · दोहा
ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ नाहिं।
ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ नाहिं।
द्वापर कछुक बृंद बहु होइहहिं कलिजुग माहिं॥ ४०॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 947, 948
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ नाहिं।
एआई-प्रारूप: ऐसे अधम और दुष्ट मनुष्य सत्ययुग तथा त्रेतायुग में नहीं होते।
English explanation
AI draft: Such vile and wicked people do not exist in the Satya and Treta ages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसे | इस प्रकार के | such |
| अधम | नीच; अत्यंत हीन आचरण वाले | vile; morally base |
| मनुज | मनुष्य | human beings |
| खल | दुष्ट | wicked |
| कृतजुग | कृतयुग अर्थात सत्ययुग में | in the Krita age, also called the Satya age |
| त्रेताँ | त्रेतायुग में | in the Treta age |
| नाहिं | नहीं होते | do not exist |
2द्वापर कछुक बृंद बहु होइहहिं कलिजुग माहिं॥ ४०॥
एआई-प्रारूप: द्वापरयुग में ऐसे लोग कुछ ही होते हैं; कलियुग में इनके बहुत-से समूह होंगे।
English explanation
AI draft: In the Dvapara age there are only a few such people; in the Kali age there will be many groups of them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्वापर | द्वापरयुग में | in the Dvapara age |
| कछुक | कुछ थोड़े | a few |
| बृंद | समूह; झुंड | groups; throngs |
| बहु | बहुत-से | many |
| होइहहिं | होंगे | will be |
| कलिजुग | कलियुग | the Kali age |
| माहिं | में | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 40
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 947, 948
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।