उत्तरकाण्ड · दोहा 18 (ख) · दोहा
निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराइ।
निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराइ।
बिदा कीन्हि भगवान तब बहु प्रकार समुझाइ॥ १८ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.18 · पुस्तक पृ. 927, 928
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निज उर माल बसन मनि बालितनय पहिराइ।
अपने हृदय पर पड़ी माला, वस्त्र और मणियाँ बालि के पुत्र अंगद को पहनाकर—
English explanation
Having adorned Angada, Bali’s son, with the garland from his own chest, garments, and jewels—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| उर | हृदय पर पड़ी | worn upon his chest |
| माल | माला | garland |
| बसन | वस्त्र | garments |
| मनि | मणियाँ; रत्नाभूषण | jewels; jeweled ornaments |
| बालितनय | बालि के पुत्र अंगद को | to Angada, Bali’s son |
| पहिराइ | पहनाकर | having adorned him with |
2बिदा कीन्हि भगवान तब बहु प्रकार समुझाइ॥ १८ (ख)॥
तब भगवान श्रीराम ने अंगद को अनेक प्रकार से समझाकर विदा किया।
English explanation
Then Lord Rama sent Angada off, having counseled him in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिदा | विदा | farewell; departure |
| कीन्हि | की; विदा किया | gave; sent him off |
| भगवान | भगवान श्रीराम ने | Lord Rama |
| तब | तब | then |
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | तरह से | in ways |
| समुझाइ | समझाकर | having counseled him |
| ख | दोहा १८ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 18 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 18 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.18
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 927, 928
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