उत्तरकाण्ड · दोहा 18 (क) · दोहा
अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना सींव।
अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना सींव।
प्रभु उठाइ उर लायउ सजल नयन राजीव॥ १८ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.18 · पुस्तक पृ. 927, 928
भावार्थ और शब्दार्थ
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1अंगद बचन बिनीत सुनि रघुपति करुना सींव।
एआई-प्रारूप: करुणा की पराकाष्ठा रघुनाथ ने अंगद के विनम्र वचन सुने।
English explanation
AI draft: Rama, the very pinnacle of compassion, heard Angada’s humble words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंगद | अंगद के; बालि के पुत्र | of Angada, Bali’s son |
| बचन | वचन | words |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| करुना | करुणा की | of compassion |
| सींव | पराकाष्ठा; चरम सीमा | pinnacle; utmost limit |
2प्रभु उठाइ उर लायउ सजल नयन राजीव॥ १८ (क)॥
प्रभु ने अंगद को उठाकर हृदय से लगा लिया; उनके कमल जैसे नेत्र आँसुओं से भर गए।
English explanation
The Lord lifted Angada and clasped him to his heart; his lotus-like eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु श्रीराम ने | the Lord Rama |
| उठाइ | अंगद को उठाकर | having lifted Angada |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लायउ | लगा लिया | clasped |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| राजीव | कमल जैसे | lotus-like |
| क | दोहा १८ के प्रथम भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 18 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 18 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.18
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 927, 928
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