उत्तरकाण्ड · दोहा 17 (ख) · दोहा
तब अंगद उठि नाइ सिरु सजल नयन कर जोरि।
तब अंगद उठि नाइ सिरु सजल नयन कर जोरि।
अति बिनीत बोलेउ बचन मनहुँ प्रेम रस बोरि॥ १७ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ और शब्दार्थ
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1तब अंगद उठि नाइ सिरु सजल नयन कर जोरि।
तब अंगद उठे और सिर नवाकर, आँसुओं से भरे नेत्रों तथा जुड़े हुए हाथों के साथ बोलने लगे।
English explanation
Then Angada rose and bowed his head, with tear-filled eyes and folded hands, and began to speak.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| उठि | उठकर | having risen |
| नाइ | नवाकर | having bowed |
| सिरु | सिर | his head |
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having joined together |
2अति बिनीत बोलेउ बचन मनहुँ प्रेम रस बोरि॥ १७ (ख)॥
अंगद ने अत्यंत विनम्र वचन कहे, मानो उन्हें प्रेम के रस में डुबोकर कह रहे हों।
English explanation
Angada spoke exceedingly humble words, as though dipping them in the nectar of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| बोलेउ | कहे; बोले | spoke; uttered |
| बचन | वचन | words |
| मनहुँ | मानो | as though |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| रस | रस; मधुर सार | nectar; sweet essence |
| बोरि | डुबोकर | having immersed |
| ख | दोहा १७ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of couplet 17 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 17 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।