उत्तरकाण्ड · दोहा 17 (क) · दोहा
जामवंत नीलादि सब पहिराए रघुनाथ।
जामवंत नीलादि सब पहिराए रघुनाथ।
हियँ धरि राम रूप सब चले नाइ पद माथ॥ १७ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.17 · पुस्तक पृ. 926, 927
भावार्थ और शब्दार्थ
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1जामवंत नीलादि सब पहिराए रघुनाथ।
रघुनाथ ने जामवंत, नील आदि सबको वस्त्र पहनाए।
English explanation
Rama clothed Jambavan, Nila, and all the others.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जामवंत | जामवंत, राम के रीछ सहयोगी | Jambavan, Rama’s bear ally |
| नीलादि | नील और अन्य सहयोगी | Nila and the other allies |
| सब | सभी को | all of them |
| पहिराए | वस्त्र पहनाए | clothed; dressed in garments |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2हियँ धरि राम रूप सब चले नाइ पद माथ॥ १७ (क)॥
सब राम का रूप हृदय में धारण करके और उनके चरणों में सिर नवाकर चले गए।
English explanation
All departed with Rama’s form enshrined in their hearts, after bowing their heads at his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | holding; enshrining |
| राम | भगवान राम का | of Rama |
| रूप | स्वरूप | form; image |
| सब | सभी | all |
| चले | चले गए | departed |
| नाइ | नवाकर | having bowed |
| पद | चरणों में | at his feet |
| माथ | सिर | their heads |
| क | दोहा १७ के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of couplet 17 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 17 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.17
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 926, 927
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