उत्तरकाण्ड · दोहा 19 (क) · दोहा
कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि।
कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि।
बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि॥ १९ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.19 · पुस्तक पृ. 928, 929
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कहेहु दंडवत प्रभु सैं तुम्हहि कहउँ कर जोरि।
एआई-प्रारूप अर्थ: मैं तुमसे हाथ जोड़कर कहता हूँ—प्रभु से मेरा दंडवत प्रणाम कहना।
English explanation
AI-draft meaning: With folded hands I ask you: convey my prostrations to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेहु | कहना; निवेदन करना | please convey |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर किया जाने वाला प्रणाम | prostration in reverence |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सैं | से | to |
| तुम्हहि | तुमसे; तुम्हीं से | to you |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say; I ask |
| कर | हाथ | hands |
| जोरि | जोड़कर | having folded |
2बार बार रघुनायकहि सुरति कराएहु मोरि॥ १९ (क)॥
बार-बार रघुनायक राम को मेरी याद दिलाना।
English explanation
Remind Rama, lord of the Raghu lineage, of me again and again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; फिर | after time; again |
| रघुनायकहि | रघुकुल के नायक राम को | to Rama, lord of the Raghu lineage |
| सुरति | याद; स्मरण | remembrance |
| कराएहु | कराना; दिलाना | please cause; bring about |
| मोरि | मेरी | of me; my |
| क | पद-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (a) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 19 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.19
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 928, 929
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