उत्तरकाण्ड · दोहा 74 (क) · दोहा
जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल अधीर।
जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल अधीर।
ब्याधि नास हित जननी गनति न सो सिसु पीर॥ ७४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.74 · पुस्तक पृ. 977, 977
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जदपि प्रथम दुख पावइ रोवइ बाल अधीर।
यद्यपि आरंभ में बच्चा दुख पाता है और व्याकुल होकर रोता है। (यह एआई-निर्मित अर्थ-प्रारूप है।)
English explanation
Although at first the child suffers and cries in distress. (This is an AI-generated draft interpretation.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| प्रथम | आरंभ में | at first |
| दुख | दुख | pain |
| पावइ | पाता है | experiences |
| रोवइ | रोता है | cries |
| बाल | बालक | the child |
| अधीर | व्याकुल | distressed |
2ब्याधि नास हित जननी गनति न सो सिसु पीर॥ ७४ (क)॥
रोग मिटाने के लिए माता बच्चे की उस पीड़ा को महत्त्व नहीं देती।
English explanation
To eliminate the illness, the mother does not give weight to that pain of the child.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याधि | रोग | illness |
| नास | नाश; मिटाना | elimination |
| हित | के लिए | for the sake of |
| जननी | माता | the mother |
| गनति | गिनती; महत्त्व देती है | counts; gives weight to |
| न | नहीं | not |
| सो | वह; उस | that |
| सिसु | शिशु की | of the child |
| पीर | पीड़ा | pain |
| क | दोहा-खंड का संदर्भ-चिह्न (क) | verse-section reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 74 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.74
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 977, 977
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।