उत्तरकाण्ड · दोहा 72 (ख) · दोहा
जथा अनेक बेष धरि नृत्य करइ नट कोइ।
जथा अनेक बेष धरि नृत्य करइ नट कोइ।
सोइ सोइ भाव देखावइ आपुन होइ न सोइ॥ ७२ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.72 · पुस्तक पृ. 975, 975
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1जथा अनेक बेष धरि नृत्य करइ नट कोइ।
जैसे कोई नट अनेक वेश धारण करके नृत्य करता है।
English explanation
Just as an actor dances while assuming many different costumes and roles.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| अनेक | बहुत से | many |
| बेष | वेश | costumes or guises |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| नृत्य | नाच | dance |
| करइ | करता है | performs |
| नट | अभिनेता या नर्तक | actor or dancer |
| कोइ | कोई | some; a certain |
2सोइ सोइ भाव देखावइ आपुन होइ न सोइ॥ ७२ (ख)॥
वह प्रत्येक वेश के अनुरूप भाव दिखाता है, पर स्वयं वह पात्र नहीं हो जाता।
English explanation
He displays the expressions appropriate to each role, but does not himself become the character he portrays.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | उसी-उसी | each corresponding |
| सोइ | उसी के अनुरूप | appropriate to that particular guise |
| भाव | भाव या हावभाव | feelings or expressions |
| देखावइ | दिखाता है | displays |
| आपुन | स्वयं | himself |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| न | नहीं | not |
| सोइ | वह निभाया गया पात्र | that portrayed character |
| ख | दोहा ७२ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of verse 72 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 72 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.72
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 975, 975
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।