उत्तरकाण्ड · दोहा 73 (क) · दोहा
काम क्रोध मद लोभ रत गृहासक्त दुखरूप।
काम क्रोध मद लोभ रत गृहासक्त दुखरूप।
ते किमि जानहिं रघुपतिहि मूढ़ परे तम कूप॥ ७३ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.73 · पुस्तक पृ. 976, 976
भावार्थ और शब्दार्थ
1काम क्रोध मद लोभ रत गृहासक्त दुखरूप।
एआई-प्रारूप अर्थ: जो काम, क्रोध, मद और लोभ में रत, घर-गृहस्थी में आसक्त और दुःखरूप हैं—
English explanation
AI-draft meaning: Those absorbed in lust, anger, pride, and greed, attached to household life, and embodying misery—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामवासना | lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार या मद | pride or arrogance |
| लोभ | लोभ | greed |
| रत | इनमें लीन | absorbed in these |
| गृहासक्त | घर-गृहस्थी में आसक्त | attached to home and household life |
| दुखरूप | दुःख के स्वरूप | embodiments of misery |
2ते किमि जानहिं रघुपतिहि मूढ़ परे तम कूप॥ ७३ (क)॥
वे मूढ़, अज्ञान के अंधकारमय कुएँ में पड़े हुए, श्रीराम को कैसे जान सकते हैं?
English explanation
How can those deluded people, fallen into the dark well of ignorance, know Rama, Lord of the Raghu lineage?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे लोग | those people |
| किमि | कैसे | how |
| जानहिं | जान सकते हैं | can know |
| रघुपतिहि | रघुवंश के स्वामी श्रीराम को | Rama, Lord of the Raghu lineage |
| मूढ़ | मूर्ख, विवेकहीन | deluded, lacking discernment |
| परे | पड़े हुए | fallen into |
| तम | अज्ञान का अंधकार | the darkness of ignorance |
| कूप | कुएँ में | into a well |
| क | दोहा ७३ का संदर्भ-चिह्न (क) | reference marker (a) for verse 73 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 73 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.73
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 976, 976
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।