उत्तरकाण्ड · दोहा 25 · दोहा
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार।
ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार।
सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार॥ २५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.25 · पुस्तक पृ. 934, 935
भावार्थ और शब्दार्थ
1ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार।
एआई-प्रारूप अर्थ: जो ज्ञान, वाणी और इंद्रियों से परे, अजन्मा तथा माया, मन और गुणों के पार हैं।
English explanation
AI-draft meaning: He who is beyond knowledge, speech, and the senses, unborn, and beyond illusion, mind, and the qualities of nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान; यहाँ बौद्धिक बोध | knowledge; here, intellectual understanding |
| गिरा | वाणी | speech |
| गोतीत | इंद्रियों से परे | beyond the senses |
| अज | अजन्मा; जिसका जन्म नहीं होता | unborn; not subject to birth |
| माया | माया; जगत की आभासकारी शक्ति | illusion; the power of worldly appearance |
| मन | मन | mind |
| गुन | प्रकृति के गुण | the qualities of nature |
| पार | से परे | beyond |
2सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार॥ २५॥
एआई-प्रारूप अर्थ: वही सच्चिदानंद के सघन स्वरूप श्रीराम मनुष्य के रूप में उदात्त चरित्र करते हैं।
English explanation
AI-draft meaning: That very Rama, the pure fullness of being, consciousness, and bliss, performs noble deeds in human form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही; पहले वर्णित श्रीराम | that very one; Rama just described |
| सच्चिदानंद | सत्, चित् और आनंद का स्वरूप | being, consciousness, and bliss |
| घन | सघन, अखंड स्वरूप | undivided fullness; pure embodiment |
| कर | करते हैं | performs |
| नर | मनुष्य के रूप में | in human form |
| चरित | चरित्र; आचरण और कार्य | deeds and conduct |
| उदार | उदात्त, महान | noble, exalted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 25
- स्रोत अभिलेख
- 7.25
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 934, 935
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।