उत्तरकाण्ड · दोहा 55 · दोहा
ऐसिअ प्रस्न बिहंगपति कीन्हि काग सन जाइ।
ऐसिअ प्रस्न बिहंगपति कीन्हि काग सन जाइ।
सो सब सादर कहिहउँ सुनहु उमा मन लाइ॥ ५५॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.55 · पुस्तक पृ. 960, 961
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1ऐसिअ प्रस्न बिहंगपति कीन्हि काग सन जाइ।
एआई-प्रारूप अर्थ: पक्षियों के स्वामी गरुड़ ने काकभुशुंडि के पास जाकर ऐसे प्रश्न किए।
English explanation
AI-draft meaning: Garuda, lord of birds, went to Kakabhushundi and asked such questions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसिअ | ऐसे | such |
| प्रस्न | प्रश्न | questions |
| बिहंगपति | पक्षियों के स्वामी गरुड़ | Garuda, lord of birds |
| कीन्हि | किए | asked |
| काग | काकभुशुंडि, काक-रूप में रामकथा के वक्ता | Kakabhushundi, the crow-form narrator of Rama’s story |
| सन | से | of; to |
| जाइ | जाकर | having gone |
2सो सब सादर कहिहउँ सुनहु उमा मन लाइ॥ ५५॥
एआई-प्रारूप अर्थ: हे उमा, वह सब मैं आदरपूर्वक कहूँगा; तुम मन लगाकर सुनो।
English explanation
AI-draft meaning: O Uma, I shall recount all that respectfully; listen attentively.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह, पहले उल्लिखित प्रश्नों का विवरण | that, the account just mentioned |
| सब | सब | all |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| कहिहउँ | मैं कहूँगा | I shall recount |
| सुनहु | सुनो | listen |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| मन | मन, ध्यान | mind; attention |
| लाइ | लगाकर | applying; focusing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 55
- स्रोत अभिलेख
- 7.55
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 960, 961
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।