उत्तरकाण्ड · दोहा 54 · दोहा
राम परायन ग्यान रत गुनागार मति धीर।
राम परायन ग्यान रत गुनागार मति धीर।
नाथ कहहु केहि कारन पायउ काक सरीर॥ ५४॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.54 · पुस्तक पृ. 959, 960
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राम परायन ग्यान रत गुनागार मति धीर।
आप राम के प्रति समर्पित, ज्ञान में लीन, गुणों के भंडार और स्थिर बुद्धि वाले हैं।
English explanation
You are devoted to Rama, absorbed in spiritual knowledge, a treasury of virtues, and steady in understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के प्रति | to Lord Rama |
| परायन | पूर्णतः समर्पित | wholly devoted |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान में | in spiritual knowledge |
| रत | लीन | absorbed |
| गुनागार | गुणों के भंडार | a treasury of virtues |
| मति | बुद्धि | understanding |
| धीर | स्थिर और धैर्ययुक्त | steady and composed |
2नाथ कहहु केहि कारन पायउ काक सरीर॥ ५४॥
हे नाथ, बताइए कि आपने किस कारण कौए का शरीर पाया?
English explanation
O master, tell me: for what reason did you acquire the body of a crow?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| कहहु | बताइए | please tell |
| केहि | किस | what |
| कारन | कारण से | for reason |
| पायउ | आपने पाया | you acquired |
| काक | कौए का | of a crow |
| सरीर | शरीर | body |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 54
- स्रोत अभिलेख
- 7.54
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 960
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