उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
राजीव लोचन स्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी।
मूल पाठ
राजीव लोचन स्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी।
अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी॥
प्रभु मिलत अनुजहि सोह मो पहिं जाति नहिं उपमा कही।
जनु प्रेम अरु सिंगार तनु धरि मिले बर सुषमा लही॥
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 911, 912
भावार्थ
मूल पाठ के बादकमलके समान नेत्रोंसे जल बह रहा है। सुन्दर शरीरमें पुलकावली [अत्यन्त] शोभा दे रही है। त्रिलोकीके स्वामी प्रभु श्रीरामजी छोटे भाई भरतजीको अत्यन्त प्रेमसे हृदयसे लगाकर मिले। भाईसे मिलते समय प्रभु जैसे शोभित हो रहे हैं उसकी उपमा मुझसे कही नहीं जाती। मानो प्रेम और शृंगार शरीर धारण करके मिले और श्रेष्ठ शोभाको प्राप्त हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 912 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1राजीव लोचन स्रवत जल तन ललित पुलकावलि बनी।
English explanation
Tears flow from the lotus-like eyes, and beautiful rows of goosebumps appear on the body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजीव | कमल; यहाँ नेत्रों की उपमा | lotus; here describing the eyes |
| लोचन | नेत्रों से | from the eyes |
| स्रवत | बह रहा है | is flowing |
| जल | जल, यहाँ आँसू | water, here tears |
| तन | शरीर पर | on the body |
| ललित | सुंदर | beautiful |
| पुलकावलि | रोमांच की पंक्तियाँ | rows of goosebumps |
| बनी | उभर आईं | have appeared |
2अति प्रेम हृदयँ लगाइ अनुजहि मिले प्रभु त्रिभुअन धनी॥
English explanation
Lord Rama, master of the three worlds, met his younger brother Bharata, embracing him with great love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | very great |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| हृदयँ | हृदय से, छाती से | to his heart, against his chest |
| लगाइ | लगाकर | having clasped |
| अनुजहि | छोटे भाई भरत को | his younger brother Bharata |
| मिले | मिले | met |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| त्रिभुअन | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| धनी | स्वामी | master |
3प्रभु मिलत अनुजहि सोह मो पहिं जाति नहिं उपमा कही।
English explanation
The Lord looks so splendid as he meets his younger brother that I cannot express a fitting comparison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| मिलत | मिलते हुए | while meeting |
| अनुजहि | छोटे भाई भरत से | his younger brother Bharata |
| सोह | शोभित होते हैं | looks splendid |
| मो | मुझ | me |
| पहिं | से | by |
| जाति | जाती, संभव होती | can be |
| नहिं | नहीं | not |
| उपमा | उपमा | comparison |
| कही | कही | expressed |
4जनु प्रेम अरु सिंगार तनु धरि मिले बर सुषमा लही॥
English explanation
It is as though love and beauty have taken bodily form and met, attaining exquisite splendor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| प्रेम | प्रेम | love |
| अरु | और | and |
| सिंगार | शृंगार, सौंदर्य का भाव | beauty, the aesthetic sentiment of love |
| तनु | शरीर | bodily form |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| मिले | मिले | met |
| बर | श्रेष्ठ | exquisite |
| सुषमा | शोभा | splendor |
| लही | प्राप्त की | attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 912
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 911, 912
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।