उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए।।
मूल पाठ
परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए।।
स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े।।
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 911, 912
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजी पृथ्वीपर पड़े हैं, उठाये उठते नहीं। तब कृपासिंधु श्रीरामजीने उन्हें जबर्दस्ती उठाकर हृदयसे लगा लिया। [उनके] साँवले शरीरपर रोएँ खड़े हो गये। नवीन कमलके समान नेत्रोंमें [पे्रमाश्रुओंके] जलकी बाढ़ आ गयी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 912 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परे भूमि नहिं उठत उठाए। बर करि कृपासिंधु उर लाए।।
English explanation
Bharata lay on the ground and would not rise even when lifted. Then Rama, the ocean of compassion, lifted him with force and held him to his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परे | पड़े थे | lay prostrate |
| भूमि | भूमि पर | on the ground |
| नहिं | नहीं | not |
| उठत | उठते थे | would rise |
| उठाए | उठाए जाने पर भी | even when lifted |
| बर | बल | force |
| करि | लगाकर | applying |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम ने | Rama, the ocean of compassion |
| उर | हृदय से | to his heart |
| लाए | लगा लिया | held close |
2 स्यामल गात रोम भए ठाढ़े। नव राजीव नयन जल बाढ़े।।
English explanation
The hair on Rama’s dark body stood on end, and tears welled up in his eyes, like newly blossomed lotuses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्यामल | साँवले | dark-hued |
| गात | शरीर पर | on the body |
| रोम | रोम | body hair |
| भए | हो गए | became |
| ठाढ़े | खड़े | erect |
| नव | नए खिले | newly blossomed |
| राजीव | कमल जैसे | lotus-like |
| नयन | नेत्रों में | in the eyes |
| जल | आँसू | tears |
| बाढ़े | बढ़ आए | welled up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 912
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 911, 912
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।