उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा। धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दधर्मकी धुरी धारण करनेवाले रघुकुलके स्वामी श्रीरामजीने सब ब्राह्मणोंसे मिलकर उन्हें मस्तक नवाया। फिर भरतजीने प्रभुके वे चरणकमल पकड़े जिन्हें देवता, मुनि, शङ्करजी और ब्रह्माजी [भी] नमस्कार करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 912 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा। धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा।।
गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज। नमत जिन्हहि सुर मुनि संकर अज।।
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 911, 912
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकल द्विजन्ह मिलि नायउ माथा। धर्म धुरंधर रघुकुलनाथा।।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s lineage and upholder of righteousness, greeted all the Brahmins and bowed his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| द्विजन्ह | ब्राह्मणों से | the Brahmins |
| मिलि | मिलकर | having greeted |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथा | सिर | his head |
| धर्म | धर्म का | of righteousness |
| धुरंधर | भार सँभालने वाले | staunch upholder |
| रघुकुलनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
2 गहे भरत पुनि प्रभु पद पंकज। नमत जिन्हहि सुर मुनि संकर अज।।
English explanation
Then Bharata clasped the Lord’s lotus feet, to which gods, sages, Shiva, and Brahma bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहे | पकड़ लिए | clasped |
| भरत | भरत ने | Bharata |
| पुनि | फिर | then |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल जैसे | lotus-like |
| नमत | प्रणाम करते हैं | bow to |
| जिन्हहि | जिन्हें | to which |
| सुर | देवता | gods |
| मुनि | ऋषि-मुनि | sages |
| संकर | शिव | Shiva |
| अज | ब्रह्मा | Brahma |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 912
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 911, 912
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