उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाई लक्ष्मणजीसहित दौड़कर गुरुजीके चरणकमल पकड़ लिये; उनके रोम-रोम अत्यन्त पुलकित हो रहे हैं। मुनिराज वसिष्ठजीने [उठाकर] उन्हें गले लगाकर कुशल पूछी। [प्रभुने कहा—] आपहीकी दयामें हमारी कुशल है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 912 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह।।
भेंटि कुसल बूझी मुनिराया। हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया।।
स्रोत अभिलेख 7.5 · पुस्तक पृ. 911, 912
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह।।
English explanation
Rama hurried forward with his younger brother and clasped the guru’s lotus-like feet; the hair on their bodies stood on end with intense joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धाइ | दौड़कर | having hurried forward |
| धरे | पकड़ लिए | clasped |
| गुर | गुरु के | the guru’s |
| चरन | चरण | feet |
| सरोरुह | कमल जैसे | lotus-like |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| सहित | के साथ | together with |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| पुलक | आनंद से खड़े हुए | bristling with joy |
| तनोरुह | शरीर के रोम | body hair |
2 भेंटि कुसल बूझी मुनिराया। हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया।।
English explanation
After greeting the chief sage, Rama asked about his well-being. The sage replied, ‘We are well through your grace alone.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेंटि | मिलकर | having greeted |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| बूझी | पूछी | asked about |
| मुनिराया | मुनिराज की | of the chief sage |
| हमरें | हमारी | our |
| कुसल | कुशलता | well-being |
| तुम्हारिहिं | आपकी ही | your alone |
| दाया | दया से | through grace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 912
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 911, 912
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।