उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
बापीं तड़ाग अनूप कूप मनोहरायत सोहहीं।
मूल पाठ
बापीं तड़ाग अनूप कूप मनोहरायत सोहहीं।
बहु रंग कंज अनेक खग कूजहिं मधुप गुंजारहीं।
आराम रम्य पिकादि खग रव जनु पथिक हंकारहीं॥
स्रोत अभिलेख 7.29 · पुस्तक पृ. 938, 938
भावार्थ
मूल पाठ के बादअनुपम बावलियाँ, तालाब और मनोहर तथा विशाल कुएँ शोभा दे रहे हैं, जिनकी सुन्दर [रत्नोंकी] सीढिय़ाँ और निर्मल जल देखकर देवता और मुनितक मोहित हो जाते हैं। [तालाबोंमें] अनेक रंगोंके कमल खिल रहे हैं, अनेकों पक्षी कूज रहे हैं और भौंरे गुंजार कर रहे हैं। [परम] रमणीय बगीचे कोयल आदि पक्षियोंकी [सुन्दर बोलीसे] मानो राह चलनेवालोंको बुला रहे हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 938 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बापीं तड़ाग अनूप कूप मनोहरायत सोहहीं।
English explanation
Stepwells, ponds, and incomparable, beautiful, spacious wells adorn the scene.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बापीं | बावड़ियाँ | stepwells |
| तड़ाग | तालाब | ponds |
| अनूप | अनुपम; बेजोड़ | incomparable; matchless |
| कूप | कुएँ | wells |
| मनोहरायत | सुंदर और विशाल | beautiful and spacious |
| सोहहीं | सुशोभित हैं | shine in beauty |
2बहु रंग कंज अनेक खग कूजहिं मधुप गुंजारहीं।
English explanation
There are lotuses of many colors; numerous birds sing, and bees hum.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | बहुत; अनेक | many |
| रंग | रंगों के | colors; of different colors |
| कंज | कमल | lotuses |
| अनेक | अनेक | numerous |
| खग | पक्षी | birds |
| कूजहिं | कूजते हैं | sing; warble |
| मधुप | भौंरे | bees |
| गुंजारहीं | गुंजार करते हैं | hum; buzz |
3आराम रम्य पिकादि खग रव जनु पथिक हंकारहीं॥
English explanation
In the lovely gardens, cuckoos and other birds seem to call out to travelers with their song.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आराम | बाग; उपवन | gardens; groves |
| रम्य | सुंदर; रमणीय | lovely; delightful |
| पिकादि | कोयल आदि | cuckoos and others |
| खग | पक्षी | birds |
| रव | स्वर से; बोली द्वारा | with their calls |
| जनु | मानो | as though |
| पथिक | पथिकों को; यात्रियों को | travelers |
| हंकारहीं | पुकारते हैं | call out to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 938
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 938, 938
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।