उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई।।
मूल पाठ
पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई।।
देखत पुरी अखिल अघ भागा। बन उपबन बापिका तड़ागा।।
स्रोत अभिलेख 7.29 · पुस्तक पृ. 938, 938
भावार्थ
मूल पाठ के बादनगरकी शोभा तो कुछ कही नहीं जाती। नगरके बाहर भी परम सुन्दरता है। श्रीअयोध्यापुरीके दर्शन करते ही सम्पूर्ण पाप भाग जाते हैं। [वहाँ] वन, उपवन, बावलियाँ और तालाब सुशोभित हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 938 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुर सोभा कछु बरनि न जाई। बाहेर नगर परम रुचिराई।।
English explanation
The city's splendor could not be described; outside the city too, there was extraordinary beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर की | of the city |
| सोभा | शोभा | splendor |
| कछु | कुछ भी | at all |
| बरनि | वर्णन किया | be described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
| बाहेर | बाहर | outside |
| नगर | नगर के | the city |
| परम | अत्यंत | extraordinary |
| रुचिराई | सुंदरता | beauty |
2 देखत पुरी अखिल अघ भागा। बन उपबन बापिका तड़ागा।।
English explanation
At the sight of the city, all sins flee. There were woods, gardens, stepwells, and ponds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| पुरी | पुरी को | the city |
| अखिल | समस्त | all |
| अघ | पाप | sins |
| भागा | भाग जाते हैं | flee |
| बन | वन | woods |
| उपबन | उपवन | gardens |
| बापिका | बावड़ियाँ | stepwells |
| तड़ागा | तालाब | ponds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 938
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 938, 938
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