उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी। बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी।।
मूल पाठ
कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी। बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी।।
तीर तीर तुलसिका सुहाई। बृंद बृंद बहु मुनिन्ह लगाई।।
स्रोत अभिलेख 7.29 · पुस्तक पृ. 938, 938
भावार्थ
मूल पाठ के बादनदीके किनारे कहीं-कहीं विरक्त और ज्ञानपरायण मुनि और संन्यासी निवास करते हैं। सरयूजीके किनारे-किनारे सुन्दर तुलसीजीके झुंड-के-झुंड बहुत-से पेड़ मुनियोंने लगा रखे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 938 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहुँ कहुँ सरिता तीर उदासी। बसहिं ग्यान रत मुनि संन्यासी।।
English explanation
Here and there along the riverbank lived detached sages and renunciants absorbed in spiritual knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहुँ | कहीं | here |
| कहुँ | कहीं | and there |
| सरिता | नदी | river |
| तीर | के किनारे | on the bank of |
| उदासी | संसार से विरक्त | detached from worldly life |
| बसहिं | रहते हैं | dwell |
| ग्यान | आध्यात्मिक ज्ञान में | in spiritual knowledge |
| रत | तल्लीन | absorbed |
| मुनि | मुनि | sages |
| संन्यासी | संन्यासी | renunciants |
2 तीर तीर तुलसिका सुहाई। बृंद बृंद बहु मुनिन्ह लगाई।।
English explanation
Along the banks, the sages had planted lovely holy basil in many clusters.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तीर | किनारे | along the banks |
| तीर | किनारे | all along them |
| तुलसिका | तुलसी के पौधे | holy basil plants |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| बृंद | समूहों में | in clusters |
| बृंद | समूहों में | cluster after cluster |
| बहु | बहुत-से | many |
| मुनिन्ह | मुनियों ने | by the sages |
| लगाई | लगाई | planted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 938
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 938, 938
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