उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
बाजार रुचिर न बनइ बरनत बस्तु बिनु गथ पाइए।
मूल पाठ
बाजार रुचिर न बनइ बरनत बस्तु बिनु गथ पाइए।
जहँ भूप रमानिवास तहँ की संपदा किमि गाइए॥
बैठे बजाज सराफ बनिक अनेक मनहुँ कुबेर ते।
सब सुखी सब सच्चरित सुंदर नारि नर सिसु जरठ जे॥
स्रोत अभिलेख 7.28 · पुस्तक पृ. 937, 937
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुन्दर बाजार है, जो वर्णन करते नहीं बनता; वहाँ वस्तुएँ बिना ही मूल्य मिलती हैं। जहाँ स्वयं लक्ष्मीपति राजा हों, वहाँकी सम्पत्तिका वर्णन कैसे किया जाय? बजाज (कपड़ेका व्यापार करनेवाले), सराफ (रुपये-पैसेका लेन-देन करनेवाले) आदि वणिक् (व्यापारी) बैठे हुए ऐसे जान पड़ते हैं मानो अनेक कुबेर हों। स्त्री, पुरुष, बच्चे और बूढ़े जो भी हैं, सभी सुखी, सदाचारी और सुन्दर हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 937 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बाजार रुचिर न बनइ बरनत बस्तु बिनु गथ पाइए।
English explanation
The markets are so beautiful that they defy description; goods can be obtained without money.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाजार | बाजार | markets |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| न | नहीं | not |
| बनइ | बन पड़ता; संभव होता | is possible; can be managed |
| बरनत | वर्णन करते हुए | in describing |
| बस्तु | वस्तुएँ | goods |
| बिनु | बिना | without |
| गथ | धन | money |
| पाइए | प्राप्त होती हैं | can be obtained |
2जहँ भूप रमानिवास तहँ की संपदा किमि गाइए॥
English explanation
Where Rama, the abode of Lakshmi, is king, how can the wealth of that place be described?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| भूप | राजा | king |
| रमानिवास | लक्ष्मी के निवासस्वरूप राम | Rama, the abode of Lakshmi |
| तहँ | वहाँ | there; that place |
| की | की; वहाँ से संबंधित | of; belonging to that place |
| संपदा | धन-संपत्ति और समृद्धि | wealth and prosperity |
| किमि | कैसे | how |
| गाइए | गुणगान या वर्णन किया जाए | can be praised or described |
3बैठे बजाज सराफ बनिक अनेक मनहुँ कुबेर ते।
English explanation
Many cloth merchants, gold and money dealers, and other traders sit there, as though they were all Kubera.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठे हैं | are seated |
| बजाज | कपड़े के व्यापारी | cloth merchants |
| सराफ | सोने-चाँदी और मुद्रा के व्यापारी | dealers in precious metals and money |
| बनिक | व्यापारी | merchants |
| अनेक | बहुत-से | many |
| मनहुँ | मानो | as though |
| कुबेर | धन के देवता कुबेर | Kubera, the god of wealth |
| ते | वे | they |
4सब सुखी सब सच्चरित सुंदर नारि नर सिसु जरठ जे॥
English explanation
All the women, men, children, and elderly people are happy, upright, and beautiful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सुखी | सुखी | happy |
| सब | सभी | all |
| सच्चरित | अच्छे आचरण वाले | of upright conduct |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| सिसु | बच्चे | children |
| जरठ | वृद्ध | elderly people |
| जे | जो भी हैं | all who are there |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 937
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 937, 937
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।